Tuesday, December 18, 2018

दिल्ली: घर में घुसकर महिला का किया कत्ल, पुलिस ने दबोचा

दिल्ली पुलिस ने 10 दिसम्बर को द्वारका में हुए एक महिला के कत्ल के मामले में संदीप मेंटल गैंग के शार्प शूटर को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक 10 दिसम्बर की सुबह दस बजे कपिल मलिक, उसके एक दोस्त और एक नाबालिग ने घर में घुस कर कमलेश नाम की एक महिला को 6 गोलियां मारी थी. कमलेश की मौके पर ही मौत हो गई थी. कमलेश पर उसी के पति का कत्ल का आरोप है. इस केस में कमलेश 3 साल तक जेल में रहकर आई थी.

कमलेश की हत्या के सभी आरोपी संदीप मेंटल गैंग के शार्प शूटर बताए जा रहे हैं. संदीप मेंटल और उसके दोस्त पवन की हत्या 2 मई को नजफगढ़ इलाके में कर दी गई थी. उसके बाद से संदीप मेंटल गैंग को उसका भाई सोनू चला रहा था. पुलिस का कहना है कि संदीप मेंटल के भाई सोनू को शक था कि राजीव नाम के शख्स ने संदीप मेंटल की हत्या करवाई है और उसे इसके लिए कमलेश ने ही उकसाया था.

इसके बाद से ही सेंदीप मेंटल के शूटर कमलेश की हत्या करने की फिराक में लगे थे. पुलिस को इस मामले में अभी संदीप के भाई और एक दूसरे शूटर की तलाश है. 8 महीने में हुए इन तीन कत्ल के पीछे 8 फ्लैट बताए जा रहे हैं, जो कभी संदीप मेंटल ने बनवाए थे. इन्हीं पर कब्जे को लेकर पहले संदीप और पवन की हत्या हुई और फिर कमलेश की. पुलिस का कहना है कि वो इस केस से जुड़े सभी लोगों की तलाश में कर रही है ताकि इस गैंगवार को रोका जा सके.

पीड़िता मंजू के मुताबिक वह 14 दिसंबर को रानी बाग पुलिस थाने में गई लेकिन पुलिस ने उसकी कुछ भी नहीं सुनी. उलटा डांटते-फटकारते रहे. पुलिस ने महिला को ही गलत बताया और पैसे के लिए ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया. पीड़िता के मुताबिक पुलिस ने आरोपियों की ऊंची पकड़ की भी बात की और चुप रहने को कहा.

महीनों तक बलात्कार झेलती रही मंजू के मुताबिक, 'तुलसी और अनिल गुप्ता को पुलिस ने थाने में बुलाया और उनसे अलग से पहले बात की. उसके बाद पुलिस ने मेरे पास आकर कहा कि 50 हजार तुलसी से और 60 हजार अनिल गुप्ता से दिलाते हैं और पुलिस ने एक कागज पर जबरदस्ती बोल-बोलकर मुझसे लिखवाया कि अनिल गुप्ता और तुलसी ने मेरे साथ कोई गलत काम नहीं किया और मैं यह पत्र अपनी मर्जी से लिख रही हूं. मुझ पर दबाव डाला कि यह लिखो और साईन करो. फिर मेरे से पुलिस ने साईन करवाए और मेरे ससुर को साइन करने के लिए बुलाया तो उन्होंने समझौता पत्र पढ़कर मना कर दिया. ससुर के मना करने पर पुलिस ने उनको गाली देते हुए भगा दिया और कहा कि तेरे खिलाफ उलटा मुकदमा दर्ज करते हैं. ससुर को वहां से भगाने के बाद पुलिस ने मुझे कमरे में बंद कर कहा कि अपने ससुर का भी हस्ताक्षर कर, नहीं तो तुझे भी अभी ठीक करते हैं.'

Friday, December 14, 2018

संसद पर हमले के 17 सालः इन 3 आतंकियों ने रची थी खौफनाक साजिश

संसद पर आतंकी हमले की आज 17वीं बरसी है. साल 2001 में आज ही के दिन यानी 13 दिसंबर को एनडीए शासनकाल में संसद पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने हमला किया था. उस हमले में 5 आतंकियों समेत 14 लोग मारे गए और 18 घायल हुए थे.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान में बैठे 3 खूंखार आतंकी मौलाना मसूद अजहर, गाजी बाबा उर्फ अबू जेहादी और तारिक अहमद ने अंजाम दिया था. उस वक्त केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और अब नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा सरकार देश में शासन कर रही है. लेकिन लोकतंत्र का मंदिर कहे जाने वाली संसद पर आतंकी हमले के असल गुनहगारों को अभी तक सजा नहीं मिल पाई है.

यूं तो भारत ने उन तीनों आतंकियों को पकड़ने की कई बार कोशिश की. लेकिन आज भी वे तीनों भारत की गिरफ्त से बाहर हैं. जानकारी के मुताबिक भारत के वो दुश्मन पाकिस्तान की पनाह में हैं. जिनमें से एक आज भी भारत के खिलाफ जहर उगलने से बाज नहीं आता. आपको बताते हैं कि भारत के वो दुश्मन कौन हैं और अब क्या कर रहे हैं.

मौलाना मसूद अजहर

कुख्यात आतंकियों में मौलाना मसूद अजहर का नाम शीर्ष पर आता है, 1994 में श्रीनगर में घूम रहे जैश-ए-मोहम्मद के अजहर को फरवरी में गिरफ्तार किया गया था. इस आतंकी को छुड़ाने के लिए 1995 में उसके साथियों ने कुछ विदेशी पर्यटकों को अगवा किया. हालांकि इनमें से एक भागने में कामयाब रहा, जबकि बाकी सारे पर्यटक मारे गए थे. इसके बाद 1999 में कंधार विमान अपहरण कर आंतकी ने मसूद अजहर को छुड़ाने में कामयाब हो गए थे.

वाजपेयी शासनकाल में भारत से छुटने के बाद ही उसने भारतीय संसद पर हमले साजिश रची थी. वो यहीं नहीं ठहरा, माना जाता है कि 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले में भी उसकी अहम भूमिका थी. 2016 के पठानकोट आतंकी हमले में भी उसकी भूमिका संदिग्ध मानी जाती है. भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने अजहर और उसके भाई को इस वारदात के लिए दोषी माना था. इसके बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी करतूतों को बेनकाब किया, उसके बाद इंटरपोल ने उसके खिलाफ दूसरी बार रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया.

भारत की कोशिश रही है कि अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया जाए, जिस पर अमेरिका सहमति जताता है. लेकिन इस मामले में चीन हमेशा वीटो लगा देता है. उसके संगठन जैश-ए-मोहम्मद को भारत समेत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे कई देश आतंकी ग्रुप घोषित कर रखा है. जबकि पाकिस्तान में एक तरह से उसे हीरो का दर्जा मिला हुआ है.

भारत के सबूत देने के बाद भी पाकिस्तान उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेता. मुंबई आतंकी हमले के बाद भी पाक ने उसे गिरफ्तार करने से मना कर दिया. उसने यहां तक कहा कि उसे नहीं पता कि अजहर कहां रहता है, जबकि मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि पाक के भावलपुर में रहता है. साथ ही वह पाक की कुख्यात आईएसआई का दुलारा बना हुआ है. कई बार पाक जनता को संबोधित करते हुए उसके वीडियो भी वायरल हुए, लेकिन पाक सरकार को कुछ भी पता नहीं रहता.

Tuesday, December 11, 2018

सरकार ने 3 बार किया था आरबीआई के सेक्शन-7 का इस्तेमाल, 5 मुद्दों पर था मतभेद

आरबीआई और सरकार के बीच प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन समेत कई 5 मुद्दों पर विवाद था। सरकार ने अपनी मांगों के लिए आरबीआई एक्ट की धारा-7 का भी इस्तेमाल किया था। सरकार और आरबीआई के बीच विवाद पहली बार नहीं है। बल्कि पहले भी ऐसा होता रहा है। यूपीए सरकार के दौरान पी चिदंबरम और तत्कालीन आरबीआई गर्वनर डी सुब्बाराव के बीच भी मतभेद सामने आए थे। दोनों के बीच ब्याज दरों और कर्ज को लेकर विवाद था।

उर्जित पटेल के कार्यकाल के दौरान सरकार-आरबीआई के बीच विवाद के मुद्दे

आरबीआई ने प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) की रूपरेखा के तहत कुछ नियम तय किए थे। यही सरकार और आरबीआई गवर्नर के बीच विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा था। रिजर्व बैंक ने 12 बैंकों को त्वरित कारवाई की श्रेणी में डाला। ये नया कर्ज नहीं दे सकते, नई ब्रांच नहीं खोल सकते और ना ही डिविडेंड दे सकते हैं।
सरकार पीसीए नियमों में ढील चाहती है ताकि कर्ज देना बढ़ सके। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि बैंकों की बैलेंस शीट और ना बिगड़े, इसलिए रोक जरूरी है।
अंतर-मंत्रालय समिति ने अलग पेमेंट-सेटलमेंट रेगुलेटर की सिफारिश की। रिजर्व बैंक इसके खिलाफ था। उसका अभी भी यही कहना है कि यह आरबीआई के अधीन हो। इसका प्रमुख आरबीआई गवर्नर ही हो। 
एनपीए और विल्फुल डिफॉल्टरों पर अंकुश लगाने के लिए आरबीआई ने 12 फरवरी को नियम बदले। कर्ज लौटाने में एक दिन की भी देरी हुई तो डिफॉल्ट मानकर रिजॉल्यूशन प्रक्रिया शुरू करनी पड़गी। सरकार ने इसमें ढील देने का आग्रह किया, लेकिन आरबीआई नहीं माना।
नीरव मोदी का पीएनबी फ्रॉड सामने आने के बाद सरकार ने रिजर्व बैंक की निगरानी की आलोचना की तो आरबीआई गवर्नर ने ज्यादा अधिकार मांगे ताकि सरकारी बैंकों के खिलाफ कारवाई की जा सके।
सरकार रिजर्व बैंक से ज्यादा डिविडेंड चाहती है ताकि अपना घाटा कम कर सके। आरबीआई का कहना है कि सरकार इसकी स्वायत्तता को कम कर रही है। अभी इसकी बैलेंस शीट मजबूत बनाने की जरूरत है।

आरबीआई-सरकार का विवाद: कब क्या हुआ ?
8 अगस्त: सरकार ने संघ की विचारधारा वाले एस गरुमूर्ति और स्वदेशी समर्थक सतीश मराठे को आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया।
सितंबर: सरकार ने आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में शामिल सदस्य नचिकेत मोर का कार्यकाल घटाया। 
10 अक्टूबर: सरकार ने आरबीआई एक्ट की धारा-7 के तहत आरबीआई को 3 पत्र लिखकर अपनी मांगें रखीं। 
23 अक्टूबर: करीब 8 घंटे तक आरबीआई की बोर्ड बैठक हुई, ज्यादातर मुद्दों पर कोई नतीजा नहीं निकला।
26 अक्टूबर: आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने स्वायत्तता का मुद्दा उठाते हुए सरकार को चेतावनी दी।
31 अक्टूबर: सरकार ने कहा कि आरबीआई की स्वायत्तता जरूरी है। लेकिन, बेहतर प्रशासन की जरूरत है।

Thursday, November 22, 2018

J-K विधानसभा भंग होने के बाद PM मोदी से मिले राजनाथ, लोकसभा के साथ हो सकते हैं चुनाव

जम्मू-कश्मीर में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल पर केंद्र सरकार की ओर से बयान सामने आया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा विधानसभा भंग करने का फैसला पीडीपी-NC-कांग्रेस के सरकार बनाने की गतिविधि के दबाव में नहीं लिया गया है.

सूत्रों की मानें गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को अपने चुनावी दौरे से लौट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इस बैठक में राज्य के हालात पर चर्चा हुई. बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार का मानना है कि राज्य में अब चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ ही हो सकते हैं.

केंद्रीय सूत्रों का ये भी मानना है कि विधानसभा पहले भी भंग हो सकती थी, लेकिन सुरक्षा कारणों और निकाय चुनाव के कारण नहीं हो पाई. वहीं अब पूरा फोकस निकाय चुनाव के बाकी बचे चरणों पर ही होगा.

गृह मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो राज्यपाल द्वारा जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग करने का निर्णय एक दिन पहले ही यानी मंगलवार को ले लिया गया था. मंगलवार को इसकी सारी प्रक्रिया पूरी हुई और बुधवार को इसका ऐलान कर दिया गया.

ये भी कहा जा रहा है कि सरकार बनाने के लिए कई पार्टियों की तरफ से खरीद-फरोख्त की कोशिशें की जा रही थीं, यही कारण रहा कि राज्यपाल को ये फैसला लेना पड़ा.

राज्यपाल पहले ही दे चुके हैं सफाई

आपको बता दें कि इससे पहले राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी अपने बयान में इस फैसले के कारणों को गिनाया था. राजभवन की ओर से जारी बयान में राज्यपाल ने कहा था कि उन्हें आशंका थी कि सरकार बनाने के लिए खरीद-फरोख्त हो सकती है, इसलिए उन्हें ये फैसला लेना पड़ा. उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें महबूबा मुफ्ती या सज्जाद लोन की ओर से कोई खत नहीं मिला.

राजभवन ने बाद में एक बयान में कहा, ‘‘राज्यपाल ने यह निर्णय अनेक सूत्रों के हवाले से प्राप्त सामग्री के आधार पर लिया.’’ उन्होंने ये भी कहा कि जरूरी नहीं कि राज्य के चुनाव अभी हों, ये चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ भी कराए जा सकते हैं.

Monday, November 5, 2018

जब आरबीआई से टकराए थे जवाहर लाल नेहरू

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार आरबीआई विवाद का हल ढूंढने के लिए भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की चिट्ठी का सहारा ले सकती है.

दरअसल भूतपूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का भी रिज़र्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर सर बेनेगल राम राव से मतभेद हुआ था. मतभेद का अंत बेनेगल राव के इस्तीफ़े से हुआ था.

आरबीआई के चौथे गवर्नर सर राव ने जनवरी 1957 में नेहरू सरकार से मतभेदों के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था.

उस समय नेहरू ने राव की बजाय तत्कालीन वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी का साथ दिया था.

नेहरू ने राव को एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें कहा गया था कि अगर उनके लिए काम जारी रखना मुमकिन नहीं है तो वो पद छोड़ सकते हैं. इसके कुछ ही दिनों बाद राव ने आरबीआई गवर्नर का पद छोड़ दिया था.

आरबीआई का काम सरकार को सलाह देना ज़रूर है, लेकिन इसे सरकार के साथ मिलकर चलना होगा.''

इन दिनों केंद्र की मोदी सरकार और रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के बीच तनाव की ख़बरें मीडिया में छाई हुई हैं. ऐसी चर्चा भी थी कि सरकार आरबीआई एक्ट का सेक्शन-7 लागू करके इसकी स्वायत्तता पर लगाम लगाना चाहती है.

रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने भी दो हफ़्ते पहले इशारों ही इशारों में सरकार पर निशाना साधा और कहा था कि सरकारों का केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता का सम्मान न किया जाना ख़तरनाक साबित हो सकता है.

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि लोगों को राम को अपने दिल में बसाना चाहिए.

राम मंदिर विवाद के बीच थरूर ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर राम दिल में हैं तो फिर इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वो कहीं और हैं या नहीं क्योंकि असल में राम हर जगह हैं.

शशि थरूर के मोदी पर बयान से भड़की बीजेपी
शशि थरूर की 'कच्ची हिंदी' सुनी है आपने?
शशि थरूर...यू आर अ गुड क्वेश्चन
पिछले कुछ वक़्त से शशि थरूर अपने बयानों से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. इससे पहले उन्होंने संघ के एक अनाम सूत्र का हवाला देते हुए कहा था कि @प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिवलिंग पर बैठे उस बिच्छू की तरह हैं जिसे न तो हाथ से हटाया जा सकता है और न चप्पल से मारा जा सकता है'.

इससे पहले थरूर ने कहा था कि एक अच्छा हिंदू किसी और के पूजा स्थल को ध्वस्त करके राम मंदिर नहीं बना सकता.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन वाली सरकार टीपू सुल्तान की जयंती मनाना जारी रखेगी.

पिछले कुछ वर्षों में कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर विवाद हुआ है. बीजेपी और इसके सहयोगी दल इसका विरोध करते हैं. उनका कहना है कि टीपू एक क्रूर, हिंदू विरोधी और कट्टर मुस्लिम शासक थे.

टीपू सुल्तान: नायक या जिहादी शासक
बीजेपी को टीपू सुल्तान से परहेज़ क्यों?
टीपू सुल्तान के रॉकेटों के ऐतिहासिक सबूत
वहीं, कर्नाटक सरकार 18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान को बहादुर और अंग्रेज़ों से लोहा लेने वाला बताकर उनकी जयंती मनाती आई है.

पिछले साल विवाद के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट की एक खंड पीठ ने टीपू की जयंती मनाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. इस साल फिर एक मामला हाई कोर्ट में दर्ज कराया गया है जिसकी सुनवाई 9 नवंबर को होनी है.