उत्तर प्रदेश में भाजपा को पटकनी देने के लिए 23 साल पुरानी दुश्मनी को भुलाकर एकसाथ आए सपा और बसपा ने चुनावी अभियान के लिए नया लोगो जारी किया है. सपा के चुनाव निशान साइकिल से सा और बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी से थी लेकर 'साथी' बनाया है. इसके साथ ही नारा दिया है कि महागठबंधन से महापरिवर्तन. यही नहीं, सपा के साइकिल के पहिए और बसपा के हाथी सूंड को जोड़कर नया लोगो रचा है.
सपा-बसपा के नए लोगों में दोनों पार्टियों के चुनाव निशान के साथ दोनों दलों के नेताओं की तस्वीरें भी लगाई गई हैं. एक तरफ जहां, सपा की साइकिल के साथ अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव और राम मनोहर लोहिया के फोटो लगे हैं. वहीं दूसरी ओर बसपा का चुनाव निशान हाथी के साथ मायावती, कांशीराम और डॉ. अंबेडकर की तस्वीर लगाई गई है.
सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके इस लोगो के क्रिएटिविटी का जिक्र किया है. साथ ही उन्होंने इसे बनाने वाली टीम को बधाई दी है. इससे करीब दो घंटे पहले ही उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती की भी तारीफ करते हुए उन्हें पिछड़ों, गरीबों और महिलाओं के सम्मान के लिए संघर्ष का मसीहा बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा समाज को पीछे ले जाना चाहती है. जबकि हम एक बेहतर भविष्य के लिए लड़ रहे हैं.
बता दें कि अखिलेश यादव और मायावती ने लोकसभा चुनाव में मिलकर नरेंद्र मोदी को हराने का फैसला किया है. सपा-बसपा उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीटों में से 38 सीटों पर बसपा और 37 सीटों पर सपा चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि, 3 सीटें चौधरी अजित सिंह की पार्टी आरएलडी को दी है. इसके अलावा अमेठी व रायबरेली में कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने की घोषणा की है.
उत्तर प्रदेश में भाजपा को पटकनी देने के लिए 23 साल पुरानी दुश्मनी को भुलाकर एकसाथ आए सपा और बसपा ने चुनावी अभियान के लिए नया लोगो जारी किया है. सपा के चुनाव निशान साइकिल से सा और बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी से थी लेकर 'साथी' बनाया है. इसके साथ ही नारा दिया है कि महागठबंधन से महापरिवर्तन. यही नहीं, सपा के साइकिल के पहिए और बसपा के हाथी सूंड को जोड़कर नया लोगो रचा है.
सपा-बसपा के नए लोगों में दोनों पार्टियों के चुनाव निशान के साथ दोनों दलों के नेताओं की तस्वीरें भी लगाई गई हैं. एक तरफ जहां, सपा की साइकिल के साथ अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव और राम मनोहर लोहिया के फोटो लगे हैं. वहीं दूसरी ओर बसपा का चुनाव निशान हाथी के साथ मायावती, कांशीराम और डॉ. अंबेडकर की तस्वीर लगाई गई है.
सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके इस लोगो के क्रिएटिविटी का जिक्र किया है. साथ ही उन्होंने इसे बनाने वाली टीम को बधाई दी है. इससे करीब दो घंटे पहले ही उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती की भी तारीफ करते हुए उन्हें पिछड़ों, गरीबों और महिलाओं के सम्मान के लिए संघर्ष का मसीहा बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा समाज को पीछे ले जाना चाहती है. जबकि हम एक बेहतर भविष्य के लिए लड़ रहे हैं.
बता दें कि अखिलेश यादव और मायावती ने लोकसभा चुनाव में मिलकर नरेंद्र मोदी को हराने का फैसला किया है. सपा-बसपा उत्तर प्रदेश के साथ-साथ मध्यप्रदेश, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीटों में से 38 सीटों पर बसपा और 37 सीटों पर सपा चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि, 3 सीटें चौधरी अजित सिंह की पार्टी आरएलडी को दी है. इसके अलावा अमेठी व रायबरेली में कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार न उतारने की घोषणा की है.
Tuesday, March 19, 2019
Tuesday, March 12, 2019
剑指形式主义 中国再发“动员令”
整治形式主义、官僚主义,为基层官员“减负”,成为2019中国两会的热门话题。近日,针对“文山会海”反弹、督查检查过多过度留痕等现象,中共中央办公厅发出《关于解决形式主义突出问题为基层减负的通知》,将2019年作为“基层减负年”。
此前,政府工作报告提出“让干部从文山会海、迎评迎检、材料报表中解脱出来,把精力用在解决实际问题上”,赢得海内外共鸣。
形式主义、官僚主义、享乐主义、奢靡之风,被中共视为需要常抓不懈的“四风”问题。2012年12月,剑指“四风”的中共“八项规定”,就包含治理“文山会海”的内容,如改进会风、精简会议,以及改进文风、可发可不发的文件一律不发等。
2018年11月,在主持中共中央政治局第十次集体学习时,习近平批评痕迹管理中存在的重“痕”不重“绩”、留“迹”不留“心”等问题。他将这种痕迹管理视为“无谓的事务”。
这是因为,当“为了工作需要而留痕”异化成“为了邀功而留痕”“为了应付而留痕”时,基层官员的精力被损耗在纸面材料的拼凑上,对推进政策落实、解决民众难题等主业毫无裨益。“一个人干,三个人看,六个人查”,是对现实中“痕迹主义”的生动还原。
文山会海、痕迹主义之危害,不仅仅在于对基层官员的身心压力上,更在于助长了“重虚不重实”的政绩评判导向、降低了中国政府机构的行政效率、恶化了民众对政府的观感,有悖于中国的国家治理体系和治理能力现代化建设,可谓“形式主义害死人”的新例证。
今年是全面建成小康社会关键之年,而在扶贫、环保等重要领域,都不同程度存在文山会海、痕迹主义的影子,此时国家层面再次发出整治“动员令”,具有现实必要性。
为此,中办文件指出,从中央层面开始“做减法”,确保发给县级以下的文件、召开的会议减少30%-50%,并列出一系列切中基层“痛点”的“负面清单”。今年的政府工作报告也提出国务院及其部门要带头做表率,通过实施“互联网+督查”来压减和规范督查检查考核事项,承诺“大幅精简会议、坚决把文件压减三分之一以上”。此举意在通过以上率下、自查自纠来扭转形式主义、官僚主义歪风。
梳理相关信息,中国至少还将从以下两个方面发力:一是结合民众提供的线索,中国官方继续曝光“坏的典型”,展示国家在整治形式主义、官僚主义问题上的决心;二是完善官员政绩考核标准,政绩最终看结果“不以痕迹论短长,而以实绩论英雄”、看民心“功成不必在我,功力必向民心”,激励官员队伍里出现更多深入基层的实干家。(完)
此前,政府工作报告提出“让干部从文山会海、迎评迎检、材料报表中解脱出来,把精力用在解决实际问题上”,赢得海内外共鸣。
形式主义、官僚主义、享乐主义、奢靡之风,被中共视为需要常抓不懈的“四风”问题。2012年12月,剑指“四风”的中共“八项规定”,就包含治理“文山会海”的内容,如改进会风、精简会议,以及改进文风、可发可不发的文件一律不发等。
2018年11月,在主持中共中央政治局第十次集体学习时,习近平批评痕迹管理中存在的重“痕”不重“绩”、留“迹”不留“心”等问题。他将这种痕迹管理视为“无谓的事务”。
这是因为,当“为了工作需要而留痕”异化成“为了邀功而留痕”“为了应付而留痕”时,基层官员的精力被损耗在纸面材料的拼凑上,对推进政策落实、解决民众难题等主业毫无裨益。“一个人干,三个人看,六个人查”,是对现实中“痕迹主义”的生动还原。
文山会海、痕迹主义之危害,不仅仅在于对基层官员的身心压力上,更在于助长了“重虚不重实”的政绩评判导向、降低了中国政府机构的行政效率、恶化了民众对政府的观感,有悖于中国的国家治理体系和治理能力现代化建设,可谓“形式主义害死人”的新例证。
今年是全面建成小康社会关键之年,而在扶贫、环保等重要领域,都不同程度存在文山会海、痕迹主义的影子,此时国家层面再次发出整治“动员令”,具有现实必要性。
为此,中办文件指出,从中央层面开始“做减法”,确保发给县级以下的文件、召开的会议减少30%-50%,并列出一系列切中基层“痛点”的“负面清单”。今年的政府工作报告也提出国务院及其部门要带头做表率,通过实施“互联网+督查”来压减和规范督查检查考核事项,承诺“大幅精简会议、坚决把文件压减三分之一以上”。此举意在通过以上率下、自查自纠来扭转形式主义、官僚主义歪风。
梳理相关信息,中国至少还将从以下两个方面发力:一是结合民众提供的线索,中国官方继续曝光“坏的典型”,展示国家在整治形式主义、官僚主义问题上的决心;二是完善官员政绩考核标准,政绩最终看结果“不以痕迹论短长,而以实绩论英雄”、看民心“功成不必在我,功力必向民心”,激励官员队伍里出现更多深入基层的实干家。(完)
Wednesday, March 6, 2019
लोकसभा चुनाव के लिए EVM से जुड़ी तैयारी पूरी: चुनाव आयोग
आम चुनावों की तारीख घोषित किए जाने में देरी को लेकर विपक्ष के आरोप के बीच निर्वाचन आयोग ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए ईवीएम से जुड़ी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ईवीएम-वीवीपीएटी पर सभी राज्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. आयोग ने बुधवार को कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए ईवीएम से जुड़ी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. 98 प्रतिशत मशीनों की पहले स्तर की चेकिंग पूरी कर ली गई है.
निर्वाचन आयोग ने कहा कि लोकसभा चुनाव को लेकर ईवीएम से जुड़ी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. 98 प्रतिशत ईवीएम की फ़र्स्ट लेवल चेकिंग पूरी हो गई है. चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश में ईवीएम-वीवीपीएटी की जांच के लिए 4 तरह की स्थितियों का जिक्र किया गया है. चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी.
इससे पहले लोकसभा चुनाव को लेकर जम्मू कश्मीर की स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने राजनीतिक नेताओं और वरिष्ठ पुलिस और जिला अधिकारियों से मुलाकात की थी. इस दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने चुनाव नतीजों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को जिम्मेदार बताए जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों ने ईवीएम मशीन को फुटबॉल बनाकर रख दिया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अभी कुछ महीने पहले कर्नाटक के अलावा पांच अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए. जहां हर जगह अलग-अलग नतीजे देखने को मिले. मैं यह कहने के लिए क्षमा मांगता हूं कि ईवीएम को राजनीतिक दलों नें फुटबॉल बना कर रख दिया है. अगर रिजल्ट एक्स आता है तो EVM अच्छा है और अगर वाई आता है तो बुरा बता दिया जाता है.
बता दें कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने गत सोमवार को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा में देरी को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा था. उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को वह 'लाभ उठाने' का लंबा समय दे रहा है. कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ने ट्वीट किया, क्या निर्वाचन आयोग प्रधानमंत्री के 'आधिकारिक' यात्रा कार्यक्रमों के आम चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले समापन होने का इंतजार कर रहा है? पटेल ने ट्वीट किया, राजनीतिक रैलियों, टीवी/रेडियो और अखबारों में बेशुमार राजनीतिक विज्ञापनों के लिए सरकारी संसाधनों का उपयोग गलत है. ऐसा लग रहा है कि निर्वाचन आयोग सरकार को जनता के धन का उपयोग कर अंतिम क्षण तक प्रचार करने का लंबा अवसर दे रहा है.
राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. सुनवाई के दौरान जब उनके वकील दलील देने के लिए खड़े हुए तो चीफ जस्टिस ने कहा कि हम संजय सिंह को नहीं सुनेंगे उन्होंने कुछ ऐसी टिप्पणियां की हैं जो ठीक नहीं हैं. चीफ जस्टिस ने संजय सिंह को कोर्ट की अवमानना के मामले में पेश होने को कहा है.
बीते साल 13 दिसंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे में फैसला सुनाया था और कहा था कि इस सौदे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है. हालांकि, तब कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सही कागजात पेश नहीं किए इसलिए फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
फैसला आने के फौरन बाद केंद्र सरकार ने संशोधन याचिका दाखिल की थी. इसके बाद प्रशांत भूषण ने याचिका दाखिल कर मांग की कि सरकार के दिए नोट में अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि राफेल मामले को लेकर दिए अपने फैसले पर खुली अदालत में फिर से विचार होगा.
आपको बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, बीजेपी के बागी नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और वकील एम एल शर्मा ने पुनर्विचार याचिका में अदालत से राफेल आदेश की समीक्षा करने के लिए अपील की है.
अपील में कहा गया कि सरकार ने राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए निर्णय लेने की सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. मोदी सरकार ने 3 P यानी के चुनाव में गफलत बनाए रखी और अनुचित लाभ लिया है.
वहीं, केंद्र सरकार की अपील में कहा गया है कि कोर्ट अपने फैसले में उस टिप्पणी में सुधार करे जिसमें CAG रिपोर्ट संसद के सामने रखने का ज़िक्र है. केंद्र का कहना है कि कोर्ट ने सरकारी नोट की गलत व्याख्या की है.
प्रशांत भूषण की एक याचिका जो सरकार द्वारा गए नोट में अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई चाहती है. इसमें लिखा गया कि ने राफेल पर संसद को अपनी रिपोर्ट सौंपी.
आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते रहे हैं. राहुल ने इस मुद्दे पर कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि पीएम मोदी ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए राफेल डील में गड़बड़ी की है.
निर्वाचन आयोग ने कहा कि लोकसभा चुनाव को लेकर ईवीएम से जुड़ी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. 98 प्रतिशत ईवीएम की फ़र्स्ट लेवल चेकिंग पूरी हो गई है. चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश में ईवीएम-वीवीपीएटी की जांच के लिए 4 तरह की स्थितियों का जिक्र किया गया है. चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी.
इससे पहले लोकसभा चुनाव को लेकर जम्मू कश्मीर की स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने राजनीतिक नेताओं और वरिष्ठ पुलिस और जिला अधिकारियों से मुलाकात की थी. इस दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने चुनाव नतीजों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को जिम्मेदार बताए जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों ने ईवीएम मशीन को फुटबॉल बनाकर रख दिया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अभी कुछ महीने पहले कर्नाटक के अलावा पांच अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए. जहां हर जगह अलग-अलग नतीजे देखने को मिले. मैं यह कहने के लिए क्षमा मांगता हूं कि ईवीएम को राजनीतिक दलों नें फुटबॉल बना कर रख दिया है. अगर रिजल्ट एक्स आता है तो EVM अच्छा है और अगर वाई आता है तो बुरा बता दिया जाता है.
बता दें कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने गत सोमवार को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा में देरी को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा था. उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को वह 'लाभ उठाने' का लंबा समय दे रहा है. कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ने ट्वीट किया, क्या निर्वाचन आयोग प्रधानमंत्री के 'आधिकारिक' यात्रा कार्यक्रमों के आम चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले समापन होने का इंतजार कर रहा है? पटेल ने ट्वीट किया, राजनीतिक रैलियों, टीवी/रेडियो और अखबारों में बेशुमार राजनीतिक विज्ञापनों के लिए सरकारी संसाधनों का उपयोग गलत है. ऐसा लग रहा है कि निर्वाचन आयोग सरकार को जनता के धन का उपयोग कर अंतिम क्षण तक प्रचार करने का लंबा अवसर दे रहा है.
राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. सुनवाई के दौरान जब उनके वकील दलील देने के लिए खड़े हुए तो चीफ जस्टिस ने कहा कि हम संजय सिंह को नहीं सुनेंगे उन्होंने कुछ ऐसी टिप्पणियां की हैं जो ठीक नहीं हैं. चीफ जस्टिस ने संजय सिंह को कोर्ट की अवमानना के मामले में पेश होने को कहा है.
बीते साल 13 दिसंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे में फैसला सुनाया था और कहा था कि इस सौदे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है. हालांकि, तब कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सही कागजात पेश नहीं किए इसलिए फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.
फैसला आने के फौरन बाद केंद्र सरकार ने संशोधन याचिका दाखिल की थी. इसके बाद प्रशांत भूषण ने याचिका दाखिल कर मांग की कि सरकार के दिए नोट में अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि राफेल मामले को लेकर दिए अपने फैसले पर खुली अदालत में फिर से विचार होगा.
आपको बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, बीजेपी के बागी नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और वकील एम एल शर्मा ने पुनर्विचार याचिका में अदालत से राफेल आदेश की समीक्षा करने के लिए अपील की है.
अपील में कहा गया कि सरकार ने राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए निर्णय लेने की सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. मोदी सरकार ने 3 P यानी के चुनाव में गफलत बनाए रखी और अनुचित लाभ लिया है.
वहीं, केंद्र सरकार की अपील में कहा गया है कि कोर्ट अपने फैसले में उस टिप्पणी में सुधार करे जिसमें CAG रिपोर्ट संसद के सामने रखने का ज़िक्र है. केंद्र का कहना है कि कोर्ट ने सरकारी नोट की गलत व्याख्या की है.
प्रशांत भूषण की एक याचिका जो सरकार द्वारा गए नोट में अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई चाहती है. इसमें लिखा गया कि ने राफेल पर संसद को अपनी रिपोर्ट सौंपी.
आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते रहे हैं. राहुल ने इस मुद्दे पर कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि पीएम मोदी ने अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए राफेल डील में गड़बड़ी की है.
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