Tuesday, February 26, 2019

पुलवामा हमले के बाद बना प्लान, 11 दिन में ऐसे दिया गया अंजाम

बीते 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के 12 दिन के भीतर भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान को सबक सिखा दिया है. वायुसेना ने मंगलवार तड़के पाकिस्तान में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को तबाह किया. जानकारी के मुताबिक वायुसेना के करीब 12 मिराज विमानों ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. वहीं हमले में 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की संभावना है. दिलचस्प यह है कि पाकिस्तान की ओर से हमले की बात स्वीकार ली गई है. हालांकि पाकिस्तान ने किसी भी तरह के नुकसान की बात मानने से इंकार कर दिया है. आइए जानते हैं कि भारत ने कैसे इस पराक्रम को अंजाम दिया.

15 फरवरी : पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना के एयर चीफ मार्शल बीरेंद्र सिंह धनोआ ने पाकिस्तान को जवाब देने के लिए एयरस्ट्राइक का प्रपोजल रखा. इस प्रपोजल को सरकार ने तुरंत मंजूरी दे दी.

16-20 फरवरी :  इसके बाद भारतीय एयरफोर्स और आर्मी ने हेरॉन ड्रोन के साथ नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर हवाई निगरानी शुरू कर दी.

20-22 फरवरी : इस दौरान भारतीय वायुसेना और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने स्ट्राइक के लिए संभावित साइट्स को निर्धारित किया.

21 फरवरी : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार अजीत डोभाल की ओर से एयरस्ट्राइक के लिए लक्ष्य को निर्धारित किया गया.

22 फरवरी :  भारतीय वायुसेना के 1 स्क्वाड्रन 'टाइगर्स' और 7  स्क्वाड्रन 'बैटल एक्सिस' को स्ट्राइक मिशन के लिए एक्टिव किया गया. इसके अलावा 2 दो मिराज स्क्वाड्रन मिशन के लिए 12 जेट चुने गए.

24 फरवरी :   पंजाब के भटिंडा से वार्निंग जेट और यूपी के आगरा से मिड एयर रिफ्यूलिंग का देश के भीतर ट्रायल किया गया.

25 फरवरी :  इस दिन ऑपरेशन की शुरुआत करते हुए 12 मिराज विमान को तैयार किया गया. स्ट्राइक से पहले मिराज पायलट ने लक्ष्य को कंफर्म किया. पाकिस्तान के भीतर मुजफ्फराबाद में लेसर गाइडेड बमों के जरिए हमला किया गया. रात 3.20 बजे से 4 बजे के बीच इस पराक्रम को अंजाम दिया गया.

26 फरवरी : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने पीएम नरेंद्र मोदी को इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले के बाद देश में कार्रवाई की मांग की जा रही थी. हमले में सुरक्षा बल के 40 जवान शहीद हुए थे. इसके बाद देशभर में पाकिस्तान पर कार्रवाई की मांग की जा रही थी.

पाकिस्तान ने खुद किया कंफर्म

भारतीय वायुसेना के हमले को खुद पाकिस्तान ने कंफर्म किया है. पाकिस्तान की सेना के अफसर आसिफ गफूर ने ट्वीट किया है, ‘‘भारतीय वायुसेना के विमान मुजफराबाद सेक्टर से घुसे. पाकिस्तानी वायुसेना की ओर से समय पर और प्रभावी जवाब मिलने के बाद वह जल्दीबाजी में अपने बम गिरा कर बालाकोट के करीब से बाहर निकल गए. जानमाल को कोई नुकसान नहीं हुआ है.’’हालांकि पाकिस्तान की ओर से हमले में नुकसान को खारिज कर दिया है.

Wednesday, February 20, 2019

फिल्ममेकर्स की सेक्सुअल डिमांड के चलते इस एक्ट्रेस ने छोड़ दी एक्टिंग

एक्ट्रेस कानी कुसृति ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म मेकर्स की सेक्सुअल डिमांड के चलते एक्ट्रेस ने एक्टिंग छोड़ दी. कानी ये भी आरोप लगाए कि मेकर्स ने उनकी मां को उन्हें समाझाने के लिए अप्रोच किया था.

कानी ने दावा किया है कि फिल्म निर्माताओं ने मेरी मां से भी संपर्क किया. मेकर्स चाहते थे कि मैं उनकी मांगों को पूरा करूं. मेकर्स ने मेरी मां को भी अप्रोच किया कि वो मुझे समझाए. हालांकि, मीटू मूवमेंट और Women in Cinema Collective के बाद से कानी को मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में बदलाव की उम्मीदें हैं. Women in Cinema Collective (डब्ल्यूसीसी) एक ऑर्गेनाइजेशन है, जिसे 2017 में मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में कामकाजी महिलाओं के कल्याण के लिए स्थापित किया गया था.

बता दें कि कानी कुसृति ने कॉकटेल और Shikkar जैसी उल्लेखनीय फिल्मों में काम किया है. उन्होंने तमिल फिल्मों पिसासू और बर्मा में भी छोटी भूमिकाएं निभाई हैं. हालांकि, एक शॉर्ट फिल्म 'मां' से उनको पहचान मिली. इसके बाद से वो तमिल दर्शकों के बीच एक लोकप्रिय चेहरा बन गईं. इसका निर्देशन सरजू केएम ने किया है.

कानी की तरह और भी कई एक्ट्रेसेस हैं जो फिल्म इंडस्ट्री के डार्क साइड को सामने लाने में मदद की है. सिंगर चिन्मई श्रीपदा से लेकर राइटर लीना मणिमेकलई तक, कई एक्ट्रेस खुलकर सामने आईं हैं. चिन्मई श्रीपदा ने इस बात का खुलासा किया था कि मशहूर सिंगर कार्ति ने अपने नाम का गलत फायदा उठाते हुए महिलाओं के साथ से दुर्व्यवहार किया है. हालांकि, कार्ति ने खुद पर लगे आरोपों का खंडन किया. उन्होंने खुद को बेगुनाह करार देते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी किसी महिला को हैरेस नहीं किया.

प्रिंस सलमान ने कहा कि भारत से हमारे रिश्ते एक हजार साल पुराने हैं. ये हमारे खून में है. पिछले 50 सालों में भारत के साथ हमारे संबंधों में काफी सुधार हुआ है. हम अपने संबंधों का विस्तार कर रहे हैं. भारत आईटी सेक्टर में काफी मजबूत है. हमने इस सेक्टर में अपने देश में निवेश किया और लाभान्वित हुए हैं.

वहीं, नरेंद्र मोदी ने कहा, 'हम अक्षय ऊर्जा के क्षेत्रों में अपने सहयोग को मज़बूत करने पर सहमत हुए हैं. हम इंटरनेशनल सोलर एलायंस में सऊदी अरब का स्वागत करते हैं. परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के सहयोग में नया आयाम देगा. उन्होंने कहा कि हमारे ऊर्जा संबंधों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में तब्दील करने का समय आ गया है. दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में सऊदी अरब की भागीदारी, हमारे ऊर्जा संबंधों को बायर-सेलर रिलेशन से बहुत आगे ले जाती है.

हालांकि जिस बड़े दिल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का स्वागत किया. माना जा रहा था कि सऊदी प्रिंस पुलवामा में हुए आतंकी हमले के साथ-साथ पाकिस्तान में फल-फूल रहे आतंकवाद का भी जिक्र करेंगे. लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई बात नहीं की. सऊदी प्रिंस दो दिन पहले पाकिस्तान के दौरे पर थे और वहां की सरकार से 20 बिलियन डॉलर की डील की.

Thursday, February 7, 2019

RBI ने ब्याज दरों में की कटौती, किसानों के लिए भी बंपर छूट का ऐलान

केन्द्रीय रिजर्व बैंक अपनी छठी मौद्रिक समीक्षा नीति का ऐलान कर दिया है. RBI ने रेपो रेट 6.5 से घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया है. जबकि रिवर्स रेपो रेट भी घटाकर 6.00 प्रतिशत कर दिया गया है. रेपो रेट में कटौती से आम आदमी को राहत मिलने वाली है, अब होम लोन के ब्याज दरों में कटौती होगी. एमपीसी के 6 में से 4 सदस्यों ने रेपो रेट में कटौती के फैसले का समर्थन किया, जबकि विरल आचार्य और चेतन घाटे रेपो रेट में कटौती के पक्ष में नहीं थे.

RBI का कहना है कि 2019-20 में देश की GDP की रफ्तार 7.4% रह सकती है. जबकि महंगाई की दर 2019-20 के पहले क्वार्टर में 3.2, दूसरे में 3.4% और तीसरे हाफ में 3.9 क्वार्टर तक रह सकती है. आरबीआई ने बड़ा फैसला लेते हुए किसानों को मिलने वाले लोन की लिमिट भी बढ़ाई है. अब बिना किसी गारंटी के किसानों को 1.60 लाख तक का लोन मिल सकेगा, पहले ये लिमिट 1 लाख रुपये तक की थी. इसके लिए जल्द ही नोटिस जारी किया जाएगा.

दरअसल अपनी द्विपक्षीय मौद्रिक समीक्षा में केन्द्रीय बैंक देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और वैश्विक अर्थव्यवस्था से मिल रही चुनौतियों को मापते हुए देश के सभी सरकारी और गैर-सरकारी बैंकों के लिए रेपो रेट और कैश रिजर्व रेशियो निर्धारित करता है. रेपो रेट वह दर है जिसपर देश का कोई बैंक रिजर्व बैंक से कम अवधि का कर्ज लेता है. रेपो रेट से देश में ब्याज दरें निर्धारित की जाती है जिसपर कारोबारी और आम बैंक उपभोक्ता को बैंक से लिए गए कर्ज अथवा बैंक में जमापूंजी पर ब्याज मिलता है. वहीं कैश रिजर्व रेशियो किसी बैंक के पास मौजूद कुल मुद्रा का वह हिस्सा है जो केन्द्रीय बैंक के अधीन है. इस रेशियो को बढ़ा घटा कर रिजर्व बैंक बाजार में तरलता और बैंक की कर्ज देने की क्षमता में परिवर्तन करता है.

तीन दिनों तक चलने वाली बैठक के आखिरी दिन होने वाले ऐलान पर देशभर के कारोबारियों की नजर इसलिए भी रहती है कि वह मौजूदा समय में महंगाई का आकलन किस तरह कर रहा है. इसके अलावा केन्द्रीय बैंक केन्द्र सरकार की जारी और प्रस्तावित योजनाओं का सरकारी खजाने पर पड़ने वाले असर का भी आकलन करते हुए केन्द्र सरकार को सलाह देने का काम करता है. गौरतलब है कि बीते कुछ वर्षों के दौरान केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक के बीच मौद्रिक नीति को लेकर विवाद सामने आए हैं. इन विवादों के चलते पूर्व के गवर्नरों ने केन्द्र सरकार पर रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को सुरक्षित रखने की बात कही है.

गौरतलब है कि 1 फरवरी को आए अंतरिम बजट में केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान योजना का ऐलान किया है. इसके अलावा मध्यम वर्ग को इनकम टैक्स में राहत देने का फैसला लिया है. जहां मध्यम वर्ग के लिए किए गए टैक्स ऐलान का असर नए वित्त वर्ष में सरकारी खजाने पर दिखेगा वहीं किसानों की योजना को मौजूदा वित्त वर्ष से ही शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया है. इन दोनों की योजनाओं का असर केन्द्र सरकार के राजस्व और खर्च पर पड़ेगा जिसके चलते पहले से ही चुनौती दे रहा वित्तीय घाटा और गंभीर हो सकता है. लिहाजा, इस छठवीं मौद्रिक नीति में लोगों की नजर इस बात पर भी होगी कि क्या रिजर्व बैंक वित्तीय घाटे पर कोई टिप्पणी करता है.

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गौरतलब है कि अंतरिम बजट में केन्द्र सरकार ने अनुमान दिया है कि अगले वित्त वर्ष 2019-20 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स से राजस्व में 18 फीसदी का इजाफा होते हुए लगभग 7.60 ट्रिलियन (लाख करोड़) रुपये हो जाएगा. वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार को उम्मीद है कि वह जीएसटी राजस्व के लक्ष्य को पाने में 1 ट्रिलियन रुपये से चूक जाएगी. मौजूदा वित्त वर्ष के लिए केन्द्र सरकार का लक्ष्य 7.43 ट्रिलियन रुपये रखा गया था लेकिन अंतरिम बजट में इसे बदलकर 6.43 ट्रिलियन रुपये आंका गया है. जाहिर है, इससे केन्द्र सरकार का वित्तीय घाटा संकट बनने के लिए तैयार है.

वहीं इनकम टैक्स के जरिए राजस्व में अंतरिम बजट का आकलन है कि 17.2 फीसदी के इजाफे के साथ 6.2 ट्रिलियन हो जाएगा. वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में 22.8 फीसदी अधिक राजस्व का आकलन किया गया है. वित्त वर्ष 2017-18 में इनकम टैक्स से सरकार को कुल 4.3 ट्रिलियन रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था. लेकिन अंतरिम बजट में किए गए प्रावधानों को देखें को केन्द्र सरकार ने लगभग 3 करोड़ टैक्स पेयर को रीबेट के जरिए राहत देते हुए जीरो टैक्स करने का ऐलान किया है. केन्द्र सरकार को उम्मीद है कि इस राहत से उसके राजस्व को 68.5 मिलियन रुपये का नुकसान होगा. लिहाजा, राजस्व के इस क्षेत्र में भी सरकार के लिए चुनौती गंभीर है.

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वहीं केन्द्र सरकार के राजस्व का तीसरा पक्ष भी चुनौतियों से भरा है. केन्द्र सरकार अपने विनिवेश के लक्ष्य से दूर खड़ी है. वित्त वर्ष 2018-19 के विनिवेश लक्ष्य 80 हजार करोड़ रुपये में सरकार लगभग 55 फीसदी पीछे है. अंतरिम बजट के मुताबिक सरकार को मौजूदा वर्ष में विनिवेश के जरिए महज लगभग 35 हजार करोड़ रुपये मिले हैं. इसके बावजूद अंतरिम बजट में केन्द्र सरकार ने 90 हजार करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद विनिवेश के जरिए लगा रखी है.

रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा में आर्थिक जानकारों की नजर जहां सरकार के लेखा जोखा पर रहेगी वहीं यह भी देखा जाएगा कि क्या चुनावी वर्ष में कारोबारी तेजी के लिए केन्द्रीय बैंक छोटे और मध्यम करोबारी के साथ-साथ मध्यम वर्ग को ब्याज दरों में राहत का रास्ता साफ करेगी?